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राजस्थान के इतिहास के प्रमुख स्रोत | Rajasthan ke itihas ke Pramukh strot

राजस्थान के इतिहास के प्रमुख स्रोत

 

राजस्थान के इतिहास के प्रमुख स्रोत
राजस्थान के इतिहास के प्रमुख स्रोत



राजस्थान इतिहास के प्रमुख स्रोत

राजस्थानी इतिहास के दो प्रमुख स्रोत है
  1.              पुरातात्विक स्रोत
  2.            साहित्यिक स्रोत

  1.              पुरातात्विक स्रोत-
ASI –
 
  •         भारतीय पुरातत्व विभाग 
  •         Archaeological Survey of India
  •          मुख्यालय – दिल्ली
  •         स्थापना – 1861
  •         स्थापना के समय मुख्यालय – कोलकाता
  •         Motto – प्रत्नकीर्तिमपावृणु
  •      जनक – कनिंघम –  भरहुप स्तूप के खोजकर्ता
राजस्थान पुरातत्व विभाग–
  •         मुख्यालय – जयपुर
  •         स्थापना – 1950
  •         राजस्थान मे पुरातात्विक सर्वेक्षण का कार्य करने A.C.L. कार्लाइल को दिया जाता है

 महत्वपूर्ण अभिलेख –

  •   अभिलेखों काअध्ययन एपिग्राफी कहलाता है
  •   भारतमेंअभिलेख लिखवाने की परम्परा प्रसिद्ध मौर्य शासक सम्राट अशोक ने प्रारम्भ की थी
  • सम्राट अशोक ने ईरानी शासक दारा सेप्र भावित होकर भारतमें अभिलेख लिखवाना प्रारम्भ किया था

 1. बिजोलिया शिलालेख– भीलवाडा, 1170 ई.
 
  •         रचयिता–गुणभद्र
  •         उत्कीर्णकर्ता– गोविन्द
  •         चौहानों को वत्सगौत्रिय ब्राह्मण बताया जाता है
  •         वर्तमान क्षेत्रोंके प्राचीन नाम जैसे नागौर – अहिच्छत्रपुर
  •        इसके अनुसार शाकम्भरी में चौहानवंश कीस्थापना वासुदेव चौहान ने की थी  तथा उसी ने सांभर में झील का निर्माण करवाया
 
  • Note –सांभर झील में मेन्था(मेढा), रूपनगढ़, खारी तथा  खण्डेला नदियों का पानी आता है

विशेष तथ्य  –
 
–        बिजोलिया ठिकाने की स्थापना अशोक परमार ने की थी
–        अशोक परमार को बिजोलिया की जागीर राणासांगा ने प्रदान की थी
2 . राज प्रशस्ति – राजसमन्द झील, 1676 ई.
 
  •     रचयिता– रणछोड़ भट्ट तेलंग (अमर काव्य  वंशावली का रचयिता)
  •  25 शिलाओं पर लिखी हुई है
  •   एशिया की सबसे बड़ी प्रशस्ति
  •    भाषा– संस्कृत
  •  मेवाड़ का इतिहास
  •   महाराणा राजसिंह की उपलब्धियों के बारे में उल्लेख मिलता है
  •   मेवाड़–  मुग़ल संधि का उल्लेख
  •  मेवाड़ मुग़ल संधि 5 फरवरी 1615 को हुई थी

विशेष तथ्य– राजस्थान की प्रसिद्ध लोकदेवी घेवरमाता का मंदिर इसी झील के तट पर है
3 . कीर्ति स्तम्भ प्रशस्ति – चितौड़गढ़, 1460 ई.
  •         रचयिता– अत्रि / महेश
  •         इस प्रशस्ति में महाराणा कुम्भा की उपलब्धियों का उल्लेख है
  •         इसमें महाराणा कुम्भा के लिए निम्न संबोधनों का प्रयोग किया गया है

a)     अभिनव भरताचार्य– संगीत ज्ञान के कारण (वीणा) 
b)     दान गुरु
c)     परम गुरु
d)     हिन्दूसुरतान– तत्कालीन सर्वश्रेष्ठ हिन्दूराजा
e)     हाल गुरु – पहाड़ी  दुर्गों का निर्माता
f)      राणा रासो – साहित्यकारों का आश्रयदाता
  •         इस प्रशस्ति में महाराणा सांगा द्वारा रचित ग्रंथों का भी उल्लेख किया गया है

                1.   संगीत राज                   5 . संगीत मीमांसा               
             2.  सूड़ प्रबंध                      6. सुधा प्रबंध
                3.   कामराज रतिसार          7. नृत्य रत्नकोष
                4. हरिवर्तिका                     8. रसिक प्रिया(गीत गोविन्द का टीका)
 
4 . वैद्यनाथ प्रशस्ति –
  •         यह प्रशस्ति पिछोला झील पर स्थित है
  •         रचयिता– रूपभट्ट
  •         इस प्रशस्ति में मेवाड़ के सिसोदिया शासक संग्राम सिंह – II ने लगवाया 
  •         इस प्रशस्ति के अनुसार बप्पा रावल को राज्य की प्राप्ति हारित ऋषि के आशीर्वाद से हुई

 
5 . बरबथ का शिलालेख – बयाना, भरतपुर
 
  •         इस शिलालेख में मुग़ल– राजपूत वैवाहिक सम्बंधों की जानकारी मिलती है

Note- 
  1. राजपुताना का पहला राजपूत शासक जिसने मुगलों के साथ वैवाहिक सम्बन्ध स्थापित किये, राजा भारमल था
  2. कच्छवाहा वंशीय शासक  राजा भारमल ने 1562 ई. में सांभर में अपनी पुत्री का विवाह सम्राट अकबर के साथ किया
 
6 . नाडेल का अभिलेख–
  •         इस अभिलेख में स्थानीय शासन प्रणाली की जानकारी मिलती है                                                                                                                                 

NOTE – स्थानीय स्वशासन के प्राचीनतम लिखित साक्ष्य उतरमेरुर अभिलेख, कर्नाटक से मिलते है
–        भारत में स्थानीय स्वशासन सम्बन्धी जानकारी दक्षिण – भारत के चोल राजवंश के समय से मिलती है
विशेष तथ्य–
 
1.     भारत में पंचायती राज की शुरुआत 2 अक्टूबर 1959 को तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरु द्वारा नागौर जिले की बगदरी गाँव से की गई
 
2.     पंचायती राज के सर्वप्रथम चुनाव 1960 में हुए थे
 
3.     आज तक पंचायतीराज के 11 बार चुनाव हुए है
 
     1960 , 65, 78, 81, 88, 95, 2000, 05, 10, 15, 20
 
–        1995 के चुनावो से राजस्थान में राजस्थान में पंचायती राज चुनाव RSEC संपन्न करवाता है
 
राजस्थान राज्य निर्वाचन आयोग (RSEC) –
 
  •         स्थापना – जुलाई,1994
  •         यह एक संवेधानिक निकाय है
  •         अनुच्छेद – 243(K)
  •         एक सदस्यीय
  •         कार्यकाल– 5 वर्ष या 65 वर्ष (आयु सीमा) जो भी पहले हो
  •         राज्य निर्वाचनआयुक्त की नियुक्ति राज्यपाल करता है
  •          प्रथम निर्वाचन आयुक्त– अमरसिंह राठोड
  •         वर्तमान निर्वाचन आयुक्त– प्रेम सिंह मेहरा

7. घोसुण्डी अभिलेख – चितौड़
 
  •           D. R. भंडारकर  द्वारा प्रकाशित
  •         भगवत या वैष्णव धर्म का उल्लेख
  •         अश्वमेघ यज्ञ की जानकारी

NOTE – भारतीय इतिहास में सर्वाधिक अश्वमेघ यज्ञ करने का रिकॉर्ड कर्नाटक के कदम्बवंशीय शासक मयूरशर्मन  के नाम है

      8. बसंतगढ़ शिलालेख – सिरोही, 682 वि.सं.
  •         राजस्थानादित्या शब्द का उल्लेख
  •        यह शिलालेख चावड़ा वंश के शासक वर्मलोत का है

   9 . कुम्भलगढ़ प्रशस्ति –
  •         रचयिता– कवि  महेश  
  •         इस प्रशस्ति में महाराणा कुम्भा की उपलब्धियों का उल्लेख मिलता है
  •         इस प्रशस्ति में बप्पारावल को विप्रवंशीय बताया गया है

 
10 . आमेर का लेख – 1612 ई.
  •         इस लेख में कच्छवाहा शासकों को रघुवंशतिलक कहा गया है

11 . जगन्नाथ राय प्रशस्ति – उदयपुर, 1652 ई.  
  •         रचयिता– कृष्णभट्ट
  •         इस प्रशस्ति में हल्दीघाटी के युद्ध की जानकारी मिलती है

 

12. बडली का लेख – अजमेर
  •         यह राजस्थान का प्राचीनतम लेख माना जाता है

 
13.  रणकपुर प्रशस्ति – पाली, 1339 ई.
 
  •         इस प्रशस्ति में बप्पा रावल और काल भोज कोअलग–अलग व्यक्ति बताया गया है
  •         इन मंदिरों का निर्माण महाराणा कुंभा के शासन काल में धरणकशाह ने करवाया
  •         प्रमुख शिल्पी– देपा
  •         रणकपुर  जैन मंदिर मथाई नदी के तट पर स्थित है

नोट– रणकपुर स्थल जैन मंदिरों के लिए जाना जाता है
14.  श्रृंगऋषिकालेख–उदयपुर,1428 ई.
 
  • रचयिता– वाणी विलास योगीश्वर
  • यह लेख भीलों के सामाजिक जीवन पर प्रकाश डालता है
15.  रायसिंह प्रशस्ति – जूनागढ़ दुर्ग (बीकानेर), 1594 ई.
  •          रचयिता– जैता
  •         इस प्रशस्ति में राव बीका से लेकर रायसिंह राठौड़ तक की जानकारी मिलती है

16.  मानमौरी का शिलालेख – चित्तौड़
 
  •         यह शिलालेख कर्नल टॉड को मिला
  •         इस शिलालेख में मौर्यशासक राजामानसिंह का उल्लेख मिलता है
  •         कर्नल टॉड ने लंदन जाते समय इस लेख को समुद्र में फेंक दिया था
 

 17.  कणसवा का लेख – कोटा
  • इस लेख में मौर्यशासक राजा धवल का उल्लेख मिलता है

 

नोट– उपयुक्त दोनों शिलालेखों (मानमौरी तथा कणसवा का लेख)  से स्पष्ट है कि मौर्यों का संबंध राजस्थान से भी रहा है
 
 
  18.  चिरवा का लेख –उदयपुर, 1273 ई.
  • रचयिता – रत्नप्रभसूरी
  •  शिल्पी – देल्हण
  •   उत्कीर्ण – केलिसिंह
  •  इस लेख में मेवाड़ के शासकों की जानकारी मिलती है

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1. राजस्थान में प्रजामंडल आन्दोलन  Download
2. राजस्थान में किसान आन्दोलन Download
3. राजस्थान में 1857 की क्रांति Download
4. राजस्थान का एकीकरण  Download
5. राजस्थान के पुरातात्विक स्थल Download
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7. मेवाड़ का इतिहास Download
8. मारवाड़ का इतिहास Download
9. चौहानों का इतिहास  Download
10. अलवर, भरतपुर, करौली, जैसलमेर रियासतों का इतिहास Download
11. राजस्थान का भूगोल Download
12. राजस्थान में अपवाह तंत्र Download
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